सेंजना: पौष्टिकता से भरपूर एक बहुउद्देशीय वृक्ष

Moringa Oleifera Drumstick Sahjan Senjana Surjana


सेंजना: पौष्टिकता से भरपूर एक बहुउद्देशीय वृक्ष


सेंजना या सुरजना या सहजन या मूंगा या मोरिंगा या अंग्रेजी में ड्रम स्टिक पौष्टिकता से भरपूर एक बहुउद्देशीय वृक्ष है। सेंजना वृक्ष का प्रत्येक भाग (जड़, छाल, तना, पत्तियाँ, फल-फूल, बीज, तेल तथा गोंद) किसी न किसी रूप में मनुष्यों एवं जानवरों द्वारा खाया अथवा उपयोग में लाया जाता है। आयुर्वेद में सेंजना का उपयोग प्राचीन समय से चला आ रहा है। पौष्टिकता से भरपूर होने के कारण इससे विभिन्न प्रकार के उत्पाद बनाए जाने लगे हैं। यदि इस पौधे का प्रत्येक घर या परिवार में विधिवत उपयोग किया जाए, तो यह कुपोषण की समस्या का समाधान करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
दुनिया के अनेक भागों में बच्चों के सुपोषित लालन-पालन और पूरे परिवार को स्वस्थ रखने के लिए सेंजना को माँ के सबसे अच्छे पोषक मित्र के रूप में माना गया है। सेंजना की पत्तियों एवं फूलों में पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं। इनको भोजन के साथ पूरक रूप में खाने पर यह बच्चों, गर्भवती स्त्रियों, नवजात शिशुओं की माताओं के लिए आदर्श भोजन माना गया है। गर्भवती महिलाओं व दुग्धपान कराने वाली माताओं हेतु सेंजना कैल्शियम व पोटेशियम के साथ विटामिन ए एवं अन्य पोषक तत्वों से भरपूर प्राकृतिक स्रोत है। औषधि सेवन के अतिरिक्त इसे सब्जी (फूल व फलियाँ), सूप (फलियाँ व फूल), चूरन (पत्तियाँ व दाने), चटनी (फूल), अचार (फलियाँ) आदि के रूप में खाया जा सकता हैं।
इसके अलावा सेंजना की पत्तियाँ शुष्क क्षेत्रों में भेड़, बकरी, गाय व भैंस के चारे के रूप में खिलाई जाती हैं, जिससे दुधारू पशुओं का दूध बढ़ता है। सेंजना की पत्तियों को छाया में सुखाकर, पीसकर चूर्ण तैयारकर इस चूर्ण को संरक्षित करके सूप, सॉस एवं सब्जियों में उपयोग करने से इनकी पौष्टिकता कई गुना बढ़ जाती है। इसकी पत्तियों से सॉस भी बनाया जा सकता है। कुपोषण प्रभावित क्षेत्र में इसका चूर्ण भोजन के साथ खिलाने से व्यक्ति कुपोषण से मुक्ति पा सकते हैं। फूलों से चटनी एवं सब्जी बनाई जाती है।
सेंजना की कच्ची हरी मुलायम फलियाँ सब्जी के रूप में सर्वाधिक उपयोग में लायी जाती हैं। इनकी फलियों में अन्य सब्जियों व फलों की तुलना में विटामिन, प्रोटीन, कैल्शियम, पोटेशियम, आयरन, एमीनो एसिड व खजिन पदार्थ अधिक होते हैं। इसकी पत्तियाँ व फूल भी विभिन्न पोषक तत्वों का एक महत्वपूर्ण स्रोत हैं। जिनमें विटामिन बी, सी व बीटा कैरोटीन, मैंगनीज तथा प्रोटीन प्रचुरता से पाए जाते हैं। फलियों के बीजों से प्राप्त तेल में जैतून के तेल से भी अधिक प्रभावशाली गुण होते हैं। इस प्रकार इस पौधे का फल, फूल, पत्ते, तना और यहाँ तक की जड़ भी उपयोगी है।


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जिले में पौष्टिकता से भरपूर सेंजना के तीस हजार पौधे तैयार
कलेक्टर बी.एस. जामोद ने सेंजना को पौष्टिकता के रूप में बेहद फायदेमंद बताते हुए कहा कि जिले के लिए उद्यानिकी विभाग में सेंजना के तीस हजार पौधे तैयार कराए हैं। सेंजना के ये पौधे स्कूलों एक आंगनबाड़ी केन्द्रों में भी लगवाए जाएंगे।
जिले की बिछरेटा नर्सरी में हैं सेंजना के पौधे
सहायक संचालक उद्यानिकी रणवीर सिंह नरवरिया ने बताया कि दतिया जिले में सेंजना के पौधों की पूर्ति करने के लिए जिले की बिछरेटा नर्सरी में तीस हजार उन्नत किस्म के पौधे तैयार किए गए हैं। इन पौधों को कोई भी व्यक्ति शुल्क अदा कर प्राप्त कर सकता हैं।